आज फिर ज़िक्र हुआ तेरा,
पर आंसु आज आया नहीं।
ठहरे थे जहां कदम कभी,
वापस वहां मैं रूका नहीं।
और जो मुकम्मल ना हों सके,
वादें हज़ार किए थे हमनें।
हां तेरे बाद भी उन वादों को,
मैंने फिर से दोहराया नहीं।
तूं इश्क़ हैं बेशक किसी का,
हां इश्क़ तेरा कोई और हैं,
पर तेरे बाद फिर इश्क़ हमसे,
ना जाने फिर क्यों हुआ नहीं।
और ताउम्र तेरे खोज में रहूं,
तूं कोई ख़ुदा तो नहीं।
पर भुला दूं तुझे दिल से कैसे,
तूं कोई बुरा सपना तो नहीं।
अब तो जीना है यादों में तेरे,
भुल जाऊं तुझे यें होगा तो नहीं।
@Roy

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