Thursday, 10 September 2020

Finding Roy

 इक उम्र कांट दिया मैंने

तन्हा जिसके इन्तज़ार में।

ढुंढता रहा जिसको मैं

हर बंजर से हर बाजार में।

वो शख़्स मुददतो बाद मिला

आज अपने ही आशियाने में।

कि खुद ही को ढुंढ लिया मैंने

आज इस मृगतृष्णा संसार में।

 


 


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