फिलहाल तो फुर्सत नहीं सांस लेने का,
कि फिर किसी रोज जिक्र करेंगे तेरे बारे में।
अभी तो गुम हूं जिंदगी की लड़ाई में,
पर कभी फिर लिखेंगे तेरे बारे में।
और अभी हूं मैं खामोश तो दुरुस्त सही,
कि फिलहाल वज़ह ना दो कलम चलाने हमें,
हां लगा जो फिर अभी हाथों में स्याही तो,
हम सजा-ऐ-कत्ल लिखेंगे तेरे बारे में।

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