कि अच्छा है,
अब वक्त का तकाज़ा है,
और बेवक्त करने को याद तुझे,
ना मेरे पास बचा कोई बहाना है,
और तुझे लगा,
कि हम उम्र भर रोते ही रह जाएंगे,
अरे नहीं रे पगली,
I text you!
क्योंकि धीरज को तुझे सच जो बताना हैं।
और सच्चाई यही है कि तूं झूठी हैं,
करके वा़दे हरबार तूं,
अपने किए वादों से मुकरती हैं,
कि मैंने ना कुछ मांगा था तुझसे,
और करूंगी मैं बात हमेशा!
यही कहा था ना तूने मुझसे,
पर मेरे पलभर की नाराजगी पर,
सबकुछ तूं भूल गई,
याद रहा मैंने जो कहा,
बस बात करना भुल गई।
तूं बस बात ही करना भुल गई।

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